Sunday, August 29, 2021

संविधान का निर्माण

 संविधान सभा की मांग


भारत में संविधान सभा के गठन का विचार वर्ष 1934 में पहली बार एम. एन. रॉय ने रखा। रॉय भारत में वामपंथी आंदोलन के प्रखर नेता थे। 1935 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने पहली बार भारत के संविधान के निर्माण के लिए आधिकारिक रूप से संविधान सभा के गठन की मांग की। 1938 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की ओर से पंडित जवाहरलाल नेहरू ने घोषणा की कि स्वतंत्र भारत के संविधान का निर्माण वयस्क मताधिकार के आधार पर चुनी गई संविधान सभा द्वारा किया जाएगा और इसमें कोई बाहरी हस्तक्षेप नहीं होगा।


नेहरू की इस मांग को अंततः ब्रिटिश सरकार ने सैद्धांतिक रूप से स्वीकार कर लिया। इसे सन 1940 के 'अगस्त प्रस्ताव' के नाम से जाना जाता है। सन 1942 में ब्रिटिश सरकार के कैबिनेट मंत्री सर स्टैफोर्ड क्रिप्स, ब्रिटिश मंत्रिमंडल के एक सदस्य, एक स्वतंत्र संविधान के निर्माण के लिए ब्रिटिश सरकार के एक प्रारूप प्रस्ताव के साथ भारत आए। इस संविधान को द्वितीय विश्व युद्ध के बाद अपनाया जाना था। क्रिप्स प्रस्ताव को मुस्लिम लीग ने अस्वीकार कर दिया। मुस्लिम लीग की मांग थी कि भारत को दो स्वायत्त हिस्सों में बांट दिया जाए, जिनकी अपनी-अपनी संविधान सभाएं हों। अंततः, भारत में एक कैबिनेट मिशन' को भेजा गया। इस मिशन ने दो संविधान सभाओं की मांग को ठुकरा दिया लेकिन उसने ऐसी संविधान सभा के निर्माण की योजना सामने रखी, जिसने मुस्लिम लीग को काफी हद तक संतुष्ट कर दिया।


संविधान सभा का गठन


कैबिनेट मिशन योजना द्वारा सुझाए गए प्रस्तावों के तहत नवंबर 1946 में संविधान सभा का गठन हुआ। योजना की विशेषताएं थीं:


1. संविधान सभा की कुल सदस्य संख्या 389 होनी थी। इनमें से 296 सीटें ब्रिटिश भारत और 93 सीटें देसी रियासतों को आवंटित की जानी थीं। ब्रिटिश भारत को आवंटित की गईं 296 सीटों में 292 सदस्यों का चयन 11 गवर्नरों के प्रांतों और चार का चयन मुख्य आयुक्तों के प्रांतों (प्रत्येक में से एक) से किया जाना था ।


2. हर प्रांत व देसी रियासतों (अथवा छोटे राज्यों के मामले में राज्यों के समूह) को उनकी जनसंख्या के अनुपात में सीटें आवंटित की जानी थीं। मोटे तौर पर कहा जाए तो प्रत्येक दस लाख लोगों पर एक सीट आवंटित की जानी थी।


3. प्रत्येक ब्रिटिश प्रांत को आवंटित की गई सीटों का निर्धारण तीन प्रमुख समुदायों के बीच उनकी जनसंख्या के अनुपात में किया जाना था। ये तीन समुदाय थे - मुस्लिम, सिख व सामान्य (मुस्लिम और सिख को छोड़कर) ।

4. प्रत्येक समुदाय के प्रतिनिधियों का चुनाव प्रांतीय असेंबली में उस समुदाय के सदस्यों द्वारा किया जाना था और एकल संक्रमणीय मत के माध्यम से समानुपातिक प्रतिनिधित्व तरीके से मतदान किया जाना था। 5. देसी रियासतों के प्रतिनिधियों का चयन रियासतों के प्रमुखों द्वारा किया जाना था।


अतः यह स्पष्ट था कि संविधान सभा आंशिक रूप से चुनी हुई और आंशिक रूप से नामांकित निकाय थी। इसके अलावा सदस्यों का चयन अप्रत्यक्ष रूप से प्रांतीय व्यवस्थापिका के सदस्यों द्वारा किया जाना था, जिनका चुनाव एक सीमित मताधिकार के आधार किया गया था।


संविधान सभा के लिए चुनाव जुलाई-अगस्त 1946 में हुआ। (ब्रिटिश भारत के लिए आवंटित 296 सीटों हेतु) इस चुनाव में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस को 208, मुस्लिम लीग को 73 तथा छोटे समूह व स्वतंत्र सदस्यों को 15 सीटें मिलीं। हालांकि देसी रियासतों को आवंटित की गईं 93 सीटें भर नहीं पाईं क्योंकि उन्होंने खुद को संविधान सभा से अलग रखने का निर्णय लिया।


यद्यपि संविधान सभा का चुनाव भारत के वयस्क मतदाताओं द्वारा प्रत्यक्ष रूप से नहीं हुआ तथापि इसमें प्रत्यके समुदाय हिंदू, मुस्लिम, सिख, पारसी, आंग्ल-भारतीय, भारतीय ईसाई, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति के प्रतिनिधियों को जगह मिली। इनमें महिलाएं भी शामिल थीं। महात्मा गांधी के अपवाद को छोड़ दें ती सभा में उस समय भारत की सभी बड़ी हस्तियां शामिल थीं।

Thursday, August 26, 2021

ताज का शासन [ 1858 से 1947 तक ]

 


1858 का भारत शासन अधिनियम


इस महत्वपूर्ण कानून का निर्माण 1857 के विद्रोह के बाद किया गया, जिसे भारत का प्रथम स्वतंत्रता संग्राम या सिपाही विद्रोह भी कहा जाता है। भारत के शासन को अच्छा बनाने वाला अधिनियम नाम के प्रसिद्ध इस कानून ने, ईस्ट इंडिया कंपनी को समाप्त कर दिया और गवर्नरों, क्षेत्रों और राजस्व संबंधी शक्तियां ब्रिटिश राजशाही को हस्तांतरित कर दीं।


अधिनियम की विशेषताएं


1. इसके तहत भारत का शासन सीधे महारानी विक्टोरिया के अधीन चला गया। गवर्नर जनरल का पदनाम बदलकर भारत का वायसराय कर दिया गया। वह (वायसराय) भारत में ब्रिटिश ताज का प्रत्यक्ष प्रतिनिधि बन गया। लॉर्ड कैनिंग भारत के प्रथम वायसराय बने ।


2. इस अधिनियम ने नियंत्रण बोर्ड और निदेशक कोर्ट समाप्त कर भारत में शासन की द्वैध प्रणाली समाप्त कर दी ।


3. एक नए पद, भारत के राज्य सचिव, का सृजन किया गया; जिसमें भारतीय प्रशासन पर संपूर्ण नियंत्रण की शक्ति निहित थी। यह सचिव ब्रिटिश कैबिनेट का सदस्य था और ब्रिटिश अंतत: संसद के प्रति उत्तरदायी था।

4. भारत सचिव की सहायता के लिए 15 सदस्यीय परिषद का गठन किया गया, जो एक सलाहकार समिति थी। परिषद का अध्यक्ष भारत सचिव को बनाया गया।


5. इस कानून के तहत भारत सचिव की परिषद का गठन किया गया, जो एक निगमित निकाय थी और जिसे भारत और इंग्लैंड में मुकदमा करने का अधिकार था। इस पर भी मुकदमा किया जा सकता था।


1858 के कानून का प्रमुख उद्देश्य प्रशासनिक मशीनरी में सुधार था, जिसके माध्यम से इंग्लैंड में भारतीय सरकार का अधीक्षण और उसका नियंत्रण हो सकता था। इसने भारत में प्रचलित शासन प्रणाली में कोई विशेष परिवर्तन नहीं किया।


1861, 1892 और 1909 के भारत परिषद अधिनियम


1857 की महान क्रांति के बाद ब्रिटिश सरकार ने महसूस किया कि भारत में शासन चलाने के लिए भारतीयों का सहयोग लेना आवश्यक है। इस सहयोग नीति के तहत ब्रिटिश संसद ने 1861, 1892 और 1909 में तीन नए अधिनियम पारित किए। 1861 का भारत परिषद अधिनियम भारतीय संवैधानिक और राजनैतिक इतिहास में एक महत्वपूर्ण अधिनियम था।

1861 के भारत परिषद अधिनियम की विशेषताएं


1. इसके द्वारा कानून बनाने की प्रक्रिया में भारतीय प्रतिनिधियों को शामिल करने की शुरुआत हुई। इस प्रकार वायसराय कुछ भारतीयों को विस्तारित परिषद में गैर-सरकारी सदस्यों के रूप में नामांकित कर सकता था। 1862 में लॉर्ड कैनिंग ने तीन भारतीयों-बनारस के राजा, पटियाला के महाराजा और सर दिनकर राव को विधान परिषद में मनोनीत किया।


2. इस अधिनियम ने मद्रास और बंबई प्रेसिडेंसियों को विधायी शक्तियां पुनः देकर विकेंद्रीकरण की प्रक्रिया की शुरुआत की। इस प्रकार इस अधिनियम ने रेगुलेटिंग एक्ट, 1773 द्वारा शुरू हुई केंद्रीयकरण की प्रवृत्ति को उलट दिया और 1833 के चार्टर अधिनियम के साथ ही अपने चरम पर पहुंच गया। इस विधायी विकास की नीति के कारण 1937 तक प्रांतों को संपूर्ण आंतरिक स्वायत्तता हासिल हो गई।


3. बंगाल, उत्तर-पश्चिम सीमा प्रांत और पंजाब में क्रमश: 1862, 1866 और 1897 में विधानपरिषदों का गठन हुआ।


4. इसने वायसराय को परिषद में कार्य संचालन के लिए अधिक नियम और आदेश बनाने की शक्तियां प्रदान कीं। इसने लॉर्ड कैनिंग द्वारा 1859 में प्रारंभ की गई पोर्टफोलियो प्रणाली को भी मान्यता दी । इसके अंतर्गत वायसराय की परिषद का एक सदस्य एक या अधिक सरकारी विभागों का प्रभारी बनाया जा सकता था तथा उसे इस विभाग में काउंसिल की ओर से अंतिम आदेश पारित करने का अधिकार था।


5. इसने वायसराय को आपातकाल में बिना काउंसिल की संस्तुति के अध्यादेश जारी करने के लिए अधिकृत किया। ऐसे अध्यादेश की अवधि मात्र छह माह होती थी।


1.6


1861


1892 के अधिनियम की विशेषताएं


1. इसके माध्यम से केंद्रीय और प्रांतीय विधान परिषदों में अतिरिक्त (गैर-सरकारी) सदस्यों की संख्या बढ़ाई गई, हालांकि बहुमत सरकारी सदस्यों का ही रहता था।


2. इसने विधान परिषदों के कार्यों में वृद्धि कर उन्हें बजट पर बहस करने और कार्यपालिका के प्रश्नों का उत्तर देने के लिए अधिकृत किया।


3. इसमें केंद्रीय विधान परिषद और बंगाल चैंबर्स ऑफ़ कॉमर्स में गैर-सरकारी सदस्यों के नामांकन के लिए वायसराय की शक्तियों का प्रावधान था। इसके अलावा प्रांतीय विधान परिषदों में गवर्नर को जिला परिषद, नगरपालिका, विश्वविद्यालय, व्यापार संघ, जमींदारों और चैम्बर ऑफ़ कॉमर्स की सिफारिशों पर गैर-सरकारी सदस्यों को नियुक्त करने की शक्ति थी।


इस अधिनियम ने केंद्रीय और प्रांतीय विधान परिषदों दोनों में गैर-सरकारी सदस्यों की नियुक्ति के लिए एक सीमित और परोक्ष रूप से चुनाव का प्रावधान किया हालांकि चुनाव शब्द का अधिनियम में प्रयोग नहीं हुआ था। इसे निश्चित निकायों की सिफारिश पर की जाने वाली नामांकन की प्रक्रिया कहा गया।"

1909 के अधिनियम की विशेषताएं 


इस अधिनियम को मॉर्ले-मिंटो सुधार के सुधार के नाम से भी जाना जाता है (उस समय लॉर्ड मॉर्ले इंग्लैंड में भारत के राज्य सचिव थे और लॉर्ड मिंटो भारत में वायसराय थे) ।

1. इसने केंद्रीय और प्रांतीय विधानपरिषदों के आकार में काफी वृद्धि की। केंद्रीय परिषद में इनकी संख्या 16 से 60 हो गई। प्रांतीय विधानपरिषदों में इनकी संख्या एक समान नहीं थी।

2. इसने केंद्रीय परिषद में सरकारी बहुमत को बनाए रखा लेकिन प्रांतीय परिषदों में गैर-सरकारी सदस्यों के बहुमत की अनुमति थी ।

3. इसने दोनों स्तरों पर विधान परिषदों के चर्चा कार्यों का

दायरा बढ़ाया। उदाहरण के तौर पर अनुपूरक प्रश्न पूछना,


बजट पर संकल्प रखना आदि।

4. इस अधिनियम के अंतर्गत पहली बार किसी भारतीय को वायसराय और गवर्नर की कार्यपरिषद के साथ एसोसिएशन बनाने का प्रावधान किया गया। सत्येंद्र प्रसाद सिन्हा वायसराय की कार्यपालिका परिषद के प्रथम भारतीय सदस्य बने। उन्हें विधि सदस्य बनाया गया था।

5. इस अधिनियम ने पृथक् निर्वाचन के आधार पर मुस्लिमों के लिए सांप्रदायिक प्रतिनिधित्व का प्रावधान किया। इसके अंतर्गत मुस्लिम सदस्यों का चुनाव मुस्लिम मतदाता ही कर सकते थे। इस प्रकार इस अधिनियम ने सांप्रदायिकता को वैधानिकता प्रदान की और लॉर्ड मिंटो को सांप्रदायिक निर्वाचन के जनक के रूप में जाना गया।

6. इसने प्रेसिडेंसी कॉरपोरेशन, चैंबर्स ऑफ़ कॉमर्स,

विश्वविद्यालयों और जमींदारों के लिए अलग प्रतिनिधित्व

का प्रावधान भी किया।


भारत शासन अधिनियम, 1919


20 अगस्त, 1917 को ब्रिटिश सरकार ने पहली बार घोषित किया


कि उसका उद्देश्य भारत में क्रमिक रूप से उत्तरदायी सरकार की स्थापना करना था।


क्रमिक रूप से 1919 में भारत शासन अधिनियम बनाया गया, जो 1921 से लागू हुआ। इस कानून को मांटेग-चेम्सफोर्ड सुधार भी कहा जाता है (मांटेग भारत के राज्य सचिव थे, जबकि चेम्सफोर्ड भारत के वायसराय थे) ।


अधिनियम की विशेषताएं


1. केंद्रीय और प्रांतीय विषयों की सूची की पहचान कर एवं उन्हें पृथक् कर राज्यों पर केंद्रीय नियंत्रण कम किया गया। 'केंद्रीय और प्रांतीय विधान परिषदों को अपनी सूचियों के विषयों पर विधान बनाने का अधिकार प्रदान किया गया। लेकिन सरकार का ढांचा केंद्रीय और एकात्मक ही बना रहा।


2. इसने प्रांतीय विषयों को पुनः दो भागों में विभक्त किया हस्तांतरित और आरक्षित हस्तांतरित विषयों पर गवर्नर का शासन होता था और इस कार्य में वह उन मंत्रियों की सहायता लेता था, जो विधान परिषद के प्रति उत्तरदायी थे। दूसरी ओर आरक्षित विषयों पर गवर्नर कार्यपालिका परिषद की सहायता से शासन करता था, जो विधान परिषद के प्रति उत्तरदायी नहीं थी। शासन की इस दोहरी व्यवस्था को द्वैध (यूनानी शब्द डाई आर्को से व्युत्पन्न) शासन व्यवस्था कहा गया। हालांकि यह व्यवस्था काफी हद तक असफल ही रही।

3. इस अधिनियम ने पहली बार देश में द्विसदनीय व्यवस्था और प्रत्यक्ष निर्वाचन की व्यवस्था प्रारंभ की। इस प्रकार भारतीय विधान परिषद के स्थान पर द्विसदनीय व्यवस्था यानी राज्यसभा और लोकसभा का गठन किया गया। दोनों सदनों के बहुसंख्यक सदस्यों को प्रत्यक्ष निर्वाचन के माध्यम से निर्वाचित किया जाता था।


4. इसके अनुसार, वायसराय की कार्यकारी परिषद के छह सदस्यों में से (कमांडर-इन-चीफ़ को छोड़कर) तीन सदस्यों का भारतीय होना आवश्यक था।


5. इसने सांप्रदायिक आधार पर सिखों, भारतीय ईसाईयों, आंग्ल-भारतीयों और यूरोपियों के लिए भी पृथक् निर्वाचन के सिद्धांत को विस्तारित कर दिया।


6. इस कानून ने संपत्ति, कर या शिक्षा के आधार पर सीमित संख्या में लोगों को मताधिकार प्रदान किया।


7. इस कानून ने लंदन में भारत के उच्चायुक्त के कार्यालय का सृजन किया और अब तक भारत सचिव द्वारा किए जा रहे कुछ कार्यों को उच्चायुक्त को स्थानांतरित कर दिया गया। 8. इससे एक लोक सेवा आयोग का गठन किया गया। अतः 1926 में सिविल सेवकों की भर्ती के लिए केंद्रीय लोक


सेवा आयोग का गठन किया गया।


9. इसने पहली बार केंद्रीय बजट को राज्यों के बजट से अलग कर दिया और राज्य विधानसभाओं को अपना बजट स्वयं बनाने के लिए अधिकृत कर दिया।


10. इसके अंतर्गत एक वैधानिक आयोग का गठन किया गया, जिसका कार्य दस वर्ष बाद जांच करने के बाद अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करना था।

साइमन आयोग


ब्रिटिश सरकार ने नवंबर 1927 में (यानि निर्धारित समय से दो वर्ष पूर्व ही) नए संविधान में भारत की स्थिति का पता लगाने के लिए सर जॉन साइमन के नेतृत्व में सात सदस्यीय वैधानिक आयोग के गठन की घोषणा की। आयोग के सभी सदस्य ब्रिटिश थे, इसलिए सभी दलों ने इसका बहिष्कार किया। आयोग ने 1930 में अपनी रिपोर्ट पेश की तथा द्वैध शासन प्रणाली, राज्यों में सरकारों का विस्तार, ब्रिटिश भारत के संघ की स्थापना एवं सांप्रदायिक निर्वाचन व्यवस्था को जारी रखने आदि की सिफारिशें कीं। आयोग के प्रस्तावों पर विचार करने के लिए ब्रिटिश सरकार ने ब्रिटिश सरकार, ब्रिटिश भारत और भारतीय रियासतों के प्रतिनिधियों के साथ तीन गोलमेज सम्मेलन किए। इन सम्मेलनों में हुयी चर्चा के आधार पर, 'संवैधानिक सुधारों पर एक श्वेत-पत्र' तैयार किया गया, जिसे विचार के लिए ब्रिटिश संसद की संयुक्त प्रवर समिति के समक्ष रखा गया। इस समिति की सिफारिशों को (कुछ संशोधनों के साथ) भारत परिषद अधिनियम, 1935 में शामिल कर दिया गया।

सांप्रदायिक अवार्ड


ब्रिटिश प्रधानमंत्री रैमजे मैकडोनाल्ड ने अगस्त 1932 में अल्पसंख्यकों के प्रतिनिधित्व पर एक योजना की घोषणा की। इसे कम्युनल अवार्ड या सांप्रदायिक अवार्ड के नाम से जाना गया। अवार्ड ने न सिर्फ मुस्लिमों, सिख, ईसाई, यूरोपियनों और आंग्ल भारतीयों के लिए अलग निर्वाचन व्यवस्था का विस्तार किया बल्कि इसे दलितों के लिए भी विस्तारित कर दिया गया। दलितों के लिए अलग निर्वाचन व्यवस्था से गांधी बहुत व्यथित हुए और उन्होंने अवार्ड में संशोधन के लिए पूना की यरवदा जेल में अनशन प्रारंभ कर दिया। अंततः कांग्रेस नेताओं और दलित नेताओं के बीच एक समझौता हुआ, जिसे पूना समझौते के नाम से जाना गया। इसमें संयुक्त हिंदू निर्वाचन व्यवस्था को बनाए रखा गया और दलितों के लिए स्थान भी आरक्षित कर दिए गए।


 

Wednesday, August 25, 2021

1853 का चार्टर अधिनियम



1793 से 1853 के दौरान ब्रिटिश संसद द्वारा पारित किए गए चार्टर अधिनियमों की श्रृंखला में यह अंतिम अधिनियम था। संवैधानिक विकास की दृष्टि से यह अधिनियम एक महत्वपूर्ण अधिनियम था। इस अधिनियम की विशेषतायें निम्नानुसार थीं:

अधिनियम की विशेषताएं 

1. इसने पहली बार गवर्नर जनरल की परिषद के विधायी एवं प्रशासनिक कार्यों को अलग कर दिया। इसके तहत परिषद में छह नए पार्षद और जोड़े गए, इन्हें विधान पार्षद कहा गया। दूसरे शब्दों में, इसने गवर्नर जनरल के लिए नई विधान परिषद का गठन किया, जिसे भारतीय (केंद्रीय) विधान परिषद कहा गया। परिषद की इस शाखा ने छोटी संसद की तरह कार्य किया। इसमें वही प्रक्रियाएं अपनाई गईं, जो ब्रिटिश संसद में अपनाई जाती थीं। इस प्रकार, विधायिका को पहली बार सरकार के विशेष कार्य के रूप में जाना गया, जिसके लिए विशेष मशीनरी और प्रक्रिया की जरूरत थी।

2. इसने सिविल सेवकों की भर्ती एवं चयन हेतु खुली प्रतियोगिता व्यवस्था का शुभारंभ किया, इस प्रकार विशिष्ट सिविल सेवा भारतीय नागरिकों के लिए भी खोल दी गई और इसके लिए 1854 में (भारतीय सिविल सेवा के संबंध में) मैकाले समिति की नियुक्त की गई।


3. इसने कंपनी के शासन को विस्तारित कर दिया और भारतीय क्षेत्र को इंग्लैंड राजशाही के विश्वास के तहत कब्जे में ॐ रखने का अधिकार दिया। लेकिन पूर्व अधिनियमों के विपरीत इसमें किसी निश्चित समय का निर्धारण नहीं किया गया था। इससे स्पष्ट था कि संसद द्वारा कंपनी का शासन किसी भी समय समाप्त किया जा सकता था ।


4. इसने प्रथम बार भारतीय केंद्रीय विधान परिषद में स्थानीय प्रतिनिधित्व प्रारंभ किया। गवर्नर-जनरल की परिषद में छह नए सदस्यों में से, चार का चुनाव बंगाल, मद्रास, बंबई और आगरा की स्थानीय प्रांतीय सरकारों द्वारा किया जाना था।

Tuesday, August 24, 2021

1833 का चार्टर अधिनियम

 ब्रिटिश भारत के केंद्रीयकरण की दिशा में यह अधिनियम निर्णायक कदम था। इस अधिनियम की विशेषतायें निम्नानुसार थीं:


अधिनियम की विशेषताएं


1. इसने बंगाल के गवर्नर जनरल को भारत का गवर्नर जनरल बना दिया, जिसमें सभी नागरिक और सैन्य शक्तियां निहित थीं। इस प्रकार, इस अधिनियम ने पहली बार एक ऐसी सरकार का निर्माण किया, जिसका ब्रिटिश कब्जे वाले संपूर्ण भारतीय क्षेत्र पर पूर्ण नियंत्रण था। लॉर्ड विलियम बैंटिक भारत के प्रथम गवर्नर जनरल थे।


2. इसने मद्रास और बंबई के गवर्नरों को विधायिका संबंधी शक्ति से वंचित कर दिया। भारत के गवर्नर जनरल को पूरे ब्रिटिश भारत में विधायिका के असीमित अधिकार प्रदान कर दिये गये। इसके अंतर्गत पहले बनाए गए कानूनों को नियामक कानून कहा गया और नए कानून के तहत बने कानूनों को एक्ट या अधिनियम कहा गया।


3. ईस्ट इंडिया कंपनी की एक व्यापारिक निकाय के रूप में की जाने वाली गतिविधियों को समाप्त कर दिया गया। अब यह विशुद्ध रूप से प्रशासनिक निकाय बन गया। इसके तहत कंपनी के अधिकार वाले क्षेत्र ब्रिटिश राजशाही और उसके उत्तराधिकारियों के विश्वास के तहत ही कब्जे में रह गए।


4 चार्टर एक्ट 1833 ने सिविल सेवकों के चयन के लिए खुली प्रतियोगिता का आयोजन शुरू करने का प्रयास किया। इसमें कहा गया कि कंपनी में भारतीयों को किसी पद, कार्यालय और रोजगार को हासिल करने से वंचित नहीं किया जायेगा। हालांकि कोर्ट ऑफ डायरेक्टर्स के विरोध के कारण इस प्रावधान को समाप्त कर दिया गया।


Monday, August 23, 2021

1784 का पिट्स इंडिया एक्ट

 एक्ट, 1773 की कमियों को दूर करने के लिए ब्रिटिश संसद ने एक संशोधित अधिनियम 1781 में पारित किया, जिसे एक्ट ऑफ़ सैटलमेंट के नाम से भी जाना जाता है। इसके बाद एक अन्य महत्वपूर्ण अधिनियम पिट्स इंडिया एक्ट, 1784' में अस्तित्व में आया।

अधिनियम की विशेषताएं

1. इसने कंपनी के राजनैतिक और वाणिज्यिक कार्यों को पृथक् पृथक् कर दिया।

2. इसने निदेशक मंडल को कंपनी के व्यापारिक मामलों के अधीक्षण की अनुमति तो दे दी लेकिन राजनैतिक मामलों के प्रबंधन के लिए नियंत्रण बोर्ड (बोर्ड ऑफ कंट्रोल) नाम से एक नए निकाय का गठन कर दिया। इस प्रकार, द्वैध शासन की व्यवस्था का शुभारंभ किया गया।

3. नियंत्रण बोर्ड को यह शक्ति थी कि वह ब्रिटिश नियंत्रित भारत में सभी नागरिक, सैन्य सरकार व राजस्व गतिविधियों का अधीक्षण एवं नियंत्रण करे।

इस प्रकार, यह अधनियम दो कारणों से महत्वपूर्ण था पहला, भारत में कंपनी के अधीन क्षेत्र को पहली बार 'ब्रिटिश आधिपत्य का क्षेत्र' कहा गया; दूसरा, ब्रिटिश सरकार को भारत में कंपनी के कार्यों और इसके प्रशासन पर पूर्ण नियंत्रण प्रदान किया गया।

Thursday, August 19, 2021

Admision notice

 ऐसे छात्र/छात्राएं जो 12th 2021 मे पास कर चुके है उनके लिए बहुत ही महत्वपूर्ण सूचना।

ऐसे छात्र/छात्राएं जिन्हें UG Course मैं admision लेना है वे तुरंत ही।

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कुछ महत्वपूर्ण जानकारी को ध्यान से पढ़ ले:-

1. Student Sign Up करने हेतु  निम्नलिखित विवरण अनिवार्य है:-

➢ Full Name (As per your 10th certificate)

➢ Email ID (valid Email Id)

➢ Mobile Number (valid Mobile No.)

➢ Password






ITI EXAM NOTICE

 ITI परीक्षा अब बहुत जल्द होने वाली है इसलिए आप सभी अपना पढ़ाई शुरू कर दे।

NCVT MIS से E-mail आ चुका है।

CBT परीक्षा अब बहुत जल्द होने वाली है। 

Notice हिंदी अनुवाद मे।

यह 2 अगस्त के समसंख्यक कार्यालय आदेश के क्रम में है, जिसमें अखिल भारतीय व्यापार परीक्षण (ITI) के लिए कंप्यूटर आधारित टेस्ट (CBT) (2020 से पूरक / बचे हुए प्रशिक्षु) की तिथियां 23 अगस्त, 2021 से निर्धारित की गई थीं। 

 2. इस संबंध में विभिन्न राज्य निदेशालयों के साथ हुई बैठक और उनके विचारों पर विचार किया गया।  साथ ही, विभिन्न प्रशिक्षुओं से परीक्षाओं की तैयारी के लिए परीक्षाओं को एक पखवाड़े तक पुनर्निर्धारित करने के लिए कई अनुरोध प्राप्त हुए हैं। 

 3. उपरोक्त को ध्यान में रखते हुए, इन परीक्षाओं को दिनांक 03.09.2021 से शुरू करने के लिए पुनर्निर्धारित करने का निर्णय लिया गया है।  इन परीक्षाओं के लिए हॉल टिकट परीक्षा शुरू होने से कम से कम 5 दिन पहले जारी किए जाएंगे।


'परीक्षा कलेंडर भी आ चुका है।'



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स्वतंत्रता संघर्ष प्रश्नोतर



1. महात्मा गांधी कांग्रेस के अध्यक्ष किस अधिवेशन में चुने गए ?
►-बेलगांव अधिवेशन (1924 ई.)

2. गदर पार्टी की स्थापना कब और कहां हुई ?
►-1 नवंबर 1913 ई. में सैनफ्रांसिस्को ( अमेरिका).

3. गदर पार्टी किसके नेतृत्व में बनी ?
►-लाला हरदयाल.

4. गदर पार्टी के पहले अध्यक्ष कौन बने ?
►-सोहन सिंह भक्खाना

5. महात्मा गांधी को कैसर-ए-हिंद की उपाधि से कब नावाजा गया ?
►-सन् 1915 में ।.

6. किस अधिवेशन में कांग्रेस के नरम दल और गरम दल में एकता हो गई?
►-लखनऊ अधिवेशन (1916 ई.)

7. मुस्लिम लीग और कांग्रेस ने मिलकर किस अधिवेशन में एक संयुक्त समिति की स्थापना की ?
►-लखनऊ अधिवेशन

8. स्वशासन के लिए बाल गंगाधर तिलक ने किस संस्था की स्थापना की ?
►-होमरूल लीग (मार्च 1916 ई. में पूना में)

9. ऐनी बेसेन्ट ने होमरूल लीग की स्थापना कब और कहां की ?
►-सितंबर 1916 ई. में मद्रास में ।

10. ऐनी बेसेंट के नेतृत्व में स्थापित होमरुल लीग के प्रथम सचिव कौन थे ?
►-जार्ज अरुण्डेल


11. भर्ती करने वाला सार्जेंट किसे कहा जाने लगा ?
►-महात्मा गांधी । क्योंकि प्रथम विश्वयुद्ध के दौरान गांधीजी ने लोगों को सेना में भर्ती होने के लिए प्रोत्साहित किया था ।

12. साबरमती आश्रम की स्थापना किसने की ?
►-महात्मा गांधी

13. महात्मा गांधी ने साबरमती आश्रम की स्थापना कब और कहां की ?
►-1916 ई. में अहमदाबाद में ।

14. चंपारण आने के लिए गांधी को किसने प्रेरित किया था ?
►-बिहार के किसान नेता राजकुमार ने ।

15. सत्याग्रह का सर्वप्रथम प्रयोग गांधी जी ने कहां किया ?
►-दक्षिण अफ्रिका

16. भारत में सत्याग्रह का सबसे पहले प्रयोग गांधी ने कहां किया ?
►-चंपारण (बिहार)

17. चंपारण का आंदोलन कब हुआ था ?
►-सन् 1917 में ।

18. चंपारण विद्रोह के कारण अंग्रेजों को कौन सी प्रथा समाप्त करनी पड़ी ?
►-तीनकठिया प्रथा

19. महात्मा गांधी ने पहली बार भूख हड़ताल किसके समर्थन में किया था ?
►-1918 ई. में अहमदाबाद मिल मजदूरों के हड़ताल के समर्थन में ।

20. 1918 ई. में महात्मा गांधी ने गुजरात के खेड़ा जिले में कौन सा आंदोलन चलाया ?
►-कर नहीं आंदोलन


21. रौलट एक्ट कब लागू किया ?
►-19 मार्च 1919 ई.

22. रौलट एक्ट क्या था ?
►-ऐसा कानून जिसके तहत किसी भी संदेहास्पद व्यक्ति को बिना मुकदमा चलाए गिरफ्तार किया जा सकता था । उसके खिलाफ ने तो कोई अपील, न कोई दलील और न कोई वकील किया जा सकता था।

23. गांधी जी ने रौलेट एक्ट के विरोध में देश व्यापी हड़ताल कब शुरु की ?
►-6 अप्रैल 1919 ई.

24. जालियांवाला बाग हत्याकांड कब हुआ ?
►-13 अप्रैल 1919 ई.

25. जालियांवाला बाग हत्याकांड कहां हुआ ?
►-अमृतसर

26. जालियांवाला बाग हत्याकांड का नेतृत्व किसने किया ?
►-जनरल डायर
*
27. जालियांबाला बाग हत्याकांड के पीछे वजह क्या थी ?
►-डॉ सतपाल और सैफुद्दीन किचलू की गिरफ्तारी के विरोध में हो रही जनसभा पर जनरल डायर ने अंधाधुंध गोली चलाई ।

28. जालियांवाला बाग हत्याकांड में कितने लोगों की मौत हुई ?
►-सरकारी रिपोर्ट के अनुसार 379 और कांग्रेस समिति के अनुसार 1000 लोग मारे हुए ।

29. जालियांवाला बाग हत्याकांड में किस भारतीय ने जनरल डायर का सहयोग किया था ?
►-हंसराज

30. किसने जालियांवाला बाग हत्याकांड के विरोध में वायसराय की कार्यकारिणी परिषद् की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया ?
►-शंकरन नायर

31. किसकी अध्यक्षता में ब्रिटिश सरकार ने जालियांवाला बाग हत्याकांड की आठ सदस्यीय जांच समिति गठित की ?
►-लॉर्ड हंटर.
https://t.me/Achievers_Gang
32. जिस जांच समिति का गठन ब्रिटश सरकार ने किया उसके सदस्यों में कितने भारतीय थे ?
►-तीन

33. कांग्रेस ने किसके नेतृत्व में जालियांवाला बाग हत्याकांड की जांच के लिए आयोग गठित की ?
►-मदन मोहन मालवीय । इस आयोग के अन्य सदस्यों में मोतीलाल नेहरू और गांधीजी भी थे ।

34. जालियांवाला बाग किस व्यक्ति की संपत्ति थी ?
►-जल्ली नाम के व्यक्ति ।

35. खिलाफत आंदोलन किसके खिलाफ शुरू किया किया ?
►-मित्र राष्ट्रों के खिलाफ । विशेषकर ब्रिटेन के खिलाफ

36. खिलाफत आंदोलन किसके समर्थन में किया गया था ?
►-टर्की के खलीफा के समर्थन में भारतीय मुसलमान ने आंदोलन शुरु किया।

37. पूरे देश में खिलाफत दिवस कब मनाया गया ?
►-19 अक्टूबर 1919 ई.

38. हिंदू और मुसलमानों की संयुक्त कांफ्रेंस की अध्यक्षता महात्मा गांधी ने कब की ?
►-23 नवंबर 1919 ई.

39. असहयोग आंदोलन कब शुरु हुआ ?
►-1 अगस्त, 1920 ई.

Jharkhand gs/gk

 1. झारखंड राज्य की स्थापना कब हुई?

(A) 1 नवम्बर,2000ई० 
(B) 10 नवम्बर,2000ई०
(C) 15 नवम्बर,2000ई०
(D) 20नवम्बर,2000ई०
उत्तर-c
2. स्थापना के आधार पर झारखंड का भारत के राज्यों में क्रम है।
(A) 26वाँ
(B) 27वाँ
(C) 28वाँ
(D) इनमें से कोई नहीं
उत्तर-c
3. राज्य के रूप में स्थापित होने से पूर्व झारखंड क्षेत्र किस नाम से जाना जाता था?
(A) उत्तर बिहार
(B) दक्षिण बिहार
(C) पूर्वी बिहार
(D) पस्चिमी बिहार
उत्तर-b
4. झारखंड का शताब्दीक अर्थ है।
(A) जल प्रदेश
(B) थल प्रदेश
(C) वन प्रदेश
(D) इनमे से कोई नहीं
उत्तर- c
5. आज का झारखंड पहले के किस क्षेत्र का             पर्यायवाची शब्द माना जाता है?
(A) छोटानागपुर संथाल परगना
(B) राजमहल
(C) पलामू
(D) इनमें से कोई नहीं
उत्तर- a

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